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श्रीमद् भागवत कथा एक जीवनमोक्ष मार्गदर्शिका

पंडित हरि नारायण वैष्णव की मधुर वाणी से श्रोता हुए प्रभावित

श्रीक्षेत्र शुक्रताल (अनिलकुमार पालीवाल)

एक ओर कृष्ण जन्म की संघर्षगाथा, दूसरी ओर गोकुल के आल्हादकारी माखनचोर कान्हा की लीलाएँ, समुद्र मंथन से विष और अमृत कलश की प्राप्ति हेतु देवता और दानवों के बीच रस्साकशी—ऐसी अनेक रोचक और जीवनदायी अनुभूतियों से सुसज्जित भागवत कथा जीवन से मृत्यु तक हर एक व्यक्ति का जीवन धन्य करती है और अंततः जीवनमोक्ष तक पहुँचा देती है। यही जीवनसत्य की मिमांसा सुप्रसिद्ध कथाकार एवं निरूपणकार पंडित हरि नारायण वैष्णव ने पालीवाल समाज तथा माँ आशापूर्णा भक्त समूह द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पाँचवें दिवस का सोपान बुनते हुए श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया।

 

यहाँ के श्री शिवधाम पावन परिसर में आयोजित इस कथा के पाँचवें दिन पंडित हरि नारायण वैष्णव ने भागवत के अनेक श्लोकों का उच्चारण कर उनके जीवन में निहित महत्व का विस्तृत वर्णन किया। इसमें उन्होंने विशेष रूप से गोपालन, गोसेवा, मातृ-पितृ सेवा, धर्म सेवा और राष्ट्र सेवा के संदर्भ में श्रोताओं को जागृति का संदेश दिया। साथ ही शुद्ध आचरण, संस्कारों का रोपण तथा आगामी पीढ़ी के उत्थान पर भी विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला।

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गोवर्धन पर्वत पूजन के महत्व का वर्णन करते हुए उन्होंने परिक्रमा की विशेषता भी समझाई। पाँचवें दिन आयोजक भक्तगणों की ओर से श्री छप्पन भोग, श्री गोवर्धन पूजा एवं फाग उत्सव का भी भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। फाग उत्सव में गीत, संगीत और नृत्य का अनोखा संगम दिखाई दिया। सभी महिला, पुरुष, बालक एवं युवा-युवतियों ने अपनी अदाकारी से इसमें भाग लेकर आनंद का रसपान किया।

इसके पश्चात सायंकाळीनं बेला के पूर्व माँ गंगा को भक्त समूह द्वारा पैदल यात्रा करके चुनरी यात्रा संपन्न करते हुवे चुनरी अर्पण की गयी l

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